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दमा रोग के कारण लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

दमा रोग के कारण लक्षण व आयुर्वेदिक उपचार

हमारे आसपास कुछ ऐसी बड़ी बीमारियां फैली हुई है जो कि हमें हर दूसरे इंसान के अंदर देखने को मिलती है यह बीमारियां खतरनाक भी होती है और यह बीमारियां एक बार किसी इंसान को लग जाए तो जल्दी से उनका पीछा भी नहीं छोड़ती और अगर यह बीमारी किसी बूढ़े इंसान में आ जाती है

तब यह उसकी मृत्यु के साथ ही पीछा छोड़ती है इसी तरह से दमा एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो कि रोगी का जल्दी से पीछा नहीं छोड़ती जिससे रोगी को सांस लेने में भी बहुत ज्यादा तकलीफ होती है तो आज के इस ब्लॉग में हम इसी खतरनाक बीमारी के कारण लक्षण व उपचार आदि के बारे में बताने वाले

दमा रोग क्या है

What is asthma in Hindi – दमा एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो कि रोगी के फेफड़ों में उत्पन्न होती है इससे रोगी को सांस लेने में बहुत कठिनाई होती है क्योंकि इस समस्या के उत्पन्न होने पर रोगी के शरीर में बलगम इकट्ठा हो जाता है जिससे उसको बार बार खांसी आती है और उसके साथ बलगम भी निकलता है यह रोग ऐसा रोग है

जो कि रोगी को दौरे के रूप में पड़ता है जब यह रोग एकदम से उठता है तब रोगी के शरीर से सांस के साथ साथ घरघराहट की आवाज सुनाई देती है

और इससे रोगी की सांसें फूलने लगती है यह रोग रोगी को रात के समय में ज्यादा परेशान करता है यह प्राय ज्यादा उम्र के लोगों में देखने को मिलता है लेकिन कई बार यह कम उम्र के इंसानों में भी उत्पन्न हो सकता है

वैसे इस रोग का अभी तक इतना ज्यादा इलाज संभव नहीं हो पाया है लेकिन अगर इस रोग के शुरुआती लक्षणों के ऊपर नियंत्रित किया जाए तो इस को काबू में भी किया जा सकता है और इस रोग को अस्थमा रोग के नाम से भी जाना जाता है

दमा रोग होने के कारण

Cause to asthma अगर दमा रोग होने के कारणों के बारे में बात की जाए तो दमा रोग होने के पीछे बहुत सारे कारण हो सकते हैं जैसे रोगी की श्वशन नली में सूजन आना, इन्फेक्शन होना या किसी वजह से घाव होना,

सर्दी जुकाम की वजह से श्वशन नली में बलगम जमा होना, इसके अलावा ज्यादा सिगरेट, तंबाकू, बीड़ी, गुटखा, पान, खैनी व शराब आदि चीजों का सेवन करना, ज्यादा तले भुने भोजन का सेवन करना,

लंबे समय तक किसी चट्टान, फैक्ट्री या धुएं वाली जगह पर काम करना, ज्यादा गंद वाले क्षेत्र में रहना, धूल वाले इलाके में रहना, ठंडी व ज्यादा गर्म हवाओं के संपर्क में आना, मानसिक तनाव रखना, ज्यादा कठोर परिश्रम करना, बे मौसमी भोजन खाना, विषैली गैस के संपर्क में आना, ज्यादा एलोपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल करना, क्षय होना आदि इस समस्या के कारण हो सकते हैं,

दमा रोग के लक्षण

Symptoms of asthma in Hindi –  अगर दमा रोग के लक्षणों के बारे में बात की जाए तो दमा रोग के कारणों की तरह ही इस रोग के कई प्रकार के लक्षण भी होते हैं जैसे रोगी को बेचैनी और घबराहट होना, रोगी को सांस लेते समय घबराहट की आवाज सुनाई देना,

रोगी के फेफड़ों में बलगम जमा होना, रोगी की खांसी के साथ ही ज्यादा मात्रा में बलगम आना, रोगी का बलगम बिल्कुल पीला आना, रोगी को ठंडे पसीने आना,

रात के समय रोगी को दमा के कारण सांस लेने में ज्यादा तकलीफ होना,रोगी को कम काम करते ही सांस भूलने लगना, रोगी की धमनिया तेज चलना, रोगी के हाथ पैर ठंडे होना, रोगी के पैरों में सूजन आना, रोगी के बलगम में खून आना, रोगी के नाखून, आंखें पीली होना आदि इस रोग के लक्षण होते हैं

बचाव Rescue

जैसा कि हमने आपको पहले बताया इस रूप की इतनी ज्यादा उपचार संभव नहीं है इसलिए इस रोग के शुरुआती लक्षणों के ऊपर नियंत्रित करके इस रोग को कंट्रोल किया जा सकता है इसलिए आपको कुछ ऐसी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होगा जो कि इस रोक को बढ़ावा देती है

  • रोगी को लक्षण दिखाई देते ही तली भुनी हुई चीजों का सेवन बंद कर देना चाहिए
  • रोगी को दूध और दूध से बने हुए पदार्थों का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए
  • रोगी को शराब, चाय, कॉफी, बीड़ी, सिगरेट आदि को बंद कर देना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा कठोर कार्य नहीं करने चाहिए
  • रोगी को घुटन वाले कमरे में नहीं रहना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा देर तक धूप व गर्मी आदि में नहीं रहना चाहिए
  • रोगी को ज्यादा भागना दौड़ना वह सीढ़ियों में चढ़ने से बचना चाहिए
  • रोगी को धूल भरे इलाके में या फैक्ट्री आदि के आस पास नहीं जाना चाहिए

उपचार Treatment

ऐसा कोई भी रोग नहीं है जिसका उपचार हमारी प्रकृति में मौजूद औषधियों के अंदर ना हो हमारी प्रकृति में ऐसी बहुत सारी जड़ी बूटियां है जिनसे आप लगभग हर प्रकार की बीमारी को ठीक कर सकते हैं तो इसी तरह से आप कुछ ऐसी चीजों का इस्तेमाल करके द मारो को भी कंट्रोल कर सकते हैं जैसे

  • रोगी को नीम के पत्तों को शहद में डालकर रोजाना सुबह-सुबह खाना चाहिए
  • रोगी को तुलसी के पत्तों को शहद और काली मिर्च के साथ भिगोकर रखें और फिर इनको लगभग 4 घंटे बाद चबाकर खाना चाहिए
  • रोगी को भीगी हुई मूंगफली का सेवन करना चाहिए जिससे यह आपके शरीर में मौजूद बलगम को हटाने में मदद करता है
  • रोगी को हर रोज गर्म पानी और शहद का सेवन करना चाहिए इससे आपके शरीर में गर्मी मिलती है और आपके शरीर से बलगम बाहर निकालने में मदद मिलती है
  • रोगी को लहसुन की 4/5 कलियां दूध में उबालकर सेवन करना चाहिए इससे आपको बहुत जल्द राहत मिलती है
  • रोगी को पानी में अजवाइन डालकर उबालना चाहिए और फिर इसकी भाप लेनी चाहिए
  • रोगी को अगर सांस लेने में ज्यादा तकलीफ हो रही है तब एक गिलास पानी में मेथी के दाने डालकर उबालना चाहिए और जब पानी बिल्कुल कम रह जाए तब शहद और अदरक के रस को मिलाकर सुबह-शाम लेना चाहिए

लेकिन फिर भी अगर किसी इंसान को दमा रोग उत्पन्न हो जाता है तब उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए और अपने टेस्ट आदि करवा कर दवाइयां लेनी चाहिए क्योंकि यह एक खतरनाक बीमारी है इससे आपको जल्द छुटकारा नहीं मिलेगा इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को देखते ही तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए

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