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पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

 

पृथ्वी राज चौहान का जीवन परिचय 

पृथ्वीराज चौहान वंश के हिंदू क्षत्रिय राजा  थे  उत्तर भारत में 12 वीं सदी में अजमेर और दिल्ली पर राज करते थे पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1149 ईस्वी अजमेर के राजा सोमेश्वर चौहान के यहां गुजरात में हुआ था इनकी माता जी का नाम कपूरी देवी था महारानी कपूरी देवी को 12 वर्ष के बाद पुत्र की प्राप्ति हुई थी वह बचपन से ही प्रतिभाशाली बालक थे

पृथ्वीराज चौहान को राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता है जब उनके पिता की मृत्यु हुई तब उन्होंने अजमेर की राजगद्दी को संभाला उस समय उनकी आयु केवल 13 वर्ष थी पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही प्रतिभाशाली और एक कुशल योद्धा थे उन्होंने बचपन में युद्ध के कई गुण सीख लिए थे पृथ्वीराज चौहान के दादा अंगम दिल्ली के शासक थे उन्होंने पृथ्वीराज चौहान की कुशलता के बारे में सुनकर दिल्ली का उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया यानी कि दिल्ली की राजगद्दी पर बिठा दिया

पृथ्वीराज चौहान एक बहुत ही बलशाली  योद्धा थे उन्होंने एक बार बिना किसी हथियार की मदद से ही एक शेर को मार गिराया था पृथ्वीराज चौहान ने केवल 13 वर्ष की उम्र में गुजरात के राजा भीमदेव को शिकस्त दी थी पृथ्वीराज चौहान को गणित ,इतिहास, सैन्य विज्ञान पुराण, वेदांत, चिकित्सा शास्त्र का विशेष ज्ञान था | पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

पृथ्वी राज चौहान का विवाह 

पृथ्वीराज चौहान का विवाह कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री संयोगिता के साथ हुआ 

तराइन का पहला युद्ध कब हुआ 

मुस्लिम शासक सुल्तान मुहम्मद गोरी ने जब भारत पर हमला किया तो पृथ्वीराज चौहान और  गौरी के बीच 1191 में तराइन में युद्ध हुआ जिसे तराइन के पहले युद्ध के नाम से भी जाना जाता है पृथ्वीराज चौहान ने मुहम्मद गौरी को 17 बार युद्ध में हराया था 18 वी बार मोहम्मद गोरी ने कन्नौज शासक जयचंद की सहायता से पृथ्वी राज चौहान को युद्ध में परास्त किया पृथ्वीराज चौहान और चंद्रवरदाई को बंदी बना लिया मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की आंखों की रोशनी छीन ली थी

पृथ्वीराज चौहान की सेना में  300000 घुड़सवार  3000 हाथी और पैदल सैनिक शामिल थे जब मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान की आखिरी इच्छा के बारे में पूछा तो पृथ्वीराज चौहान ने अपने शब्दभेदी बाण का प्रदर्शन करने के लिए कहा जिसे मुहम्मद गौरी ने स्वीकृति दे दी इसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने अपने साथी चंद्रवरदाई के साथ मिलकर मुहम्मद गौरी को मारने की साजिश रची इसके बाद चंद्रवरदाई ने काव्यात्मक रूप में एक पंक्ति कहीं जो इस प्रकार है-

चार बांस चौबीस गज ,अंगुल अष्ट प्रमाण ,ता ऊपर सुल्तान है मत चुके चौहान जैसे ही उन्होंने यह पंक्ति कहीं यह सुनकर मुहम्मद गोरी ने उन्हें शाबाश कहा  इसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने आंखों की रोशनी ना होने पर भी मुहम्मद गौरी की शब्दभेदी बाण से हत्या कर दी | पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

 तराइन का दूसरा युद्ध कब हुआ 

 दूसरा युद्ध मुहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच लड़ा गया यह युद्ध तराइन में लड़ा गया यह युद्ध 1192 में लड़ा गया इस युद्ध में  मुहम्मद गोरी का साथ कन्नौज के राजा जयचंद ने दिया था इस युद्ध में जयचंद ने मोहम्मद गौरी का साथ इसलिए दिया क्योंकि उनकी एक बेटी थी संयोगिता जो कि पृथ्वीराज चौहान से बेहद प्यार करती थी वह उसके साथ शादी करना चाहती थी परंतु जयचंद को पृथ्वीराज चौहान पसंद नहीं थे वह उन्हें दुश्मन की नजर से देखते थे

जयचंद ने अपनी बेटी का स्वयंबर रचा उन्होंने इसमें पृथ्वीराज चौहान को निमंत्रण नहीं दिया इसके बाद पृथ्वीराज चौहान ने कन्नौज जाकर  के स्वयंवर में जाकर जयचंद की आंखों के सामने से संयोगिता को उठाकर ले आया इसके बाद जयचंद को पृथ्वीराज चौहान से और भी ज्यादा नफरत होने लगी इसके बाद जयचंद और मुहम्मद गौरी ने मिलकर पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया और इसमें पृथ्वीराज चौहान फिर से हार गए | पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

पृथ्वीराज चौहान द्वारा उदल का वध 

चंदन सेना के कौन-कौन से युद्ध वीरगति को प्राप्त हुए थे महोबा के आल्हा उदल मलखान और दिल्ली के पृथ्वीराज चौहान महाराज में कई लड़ाइयां हुई लेकिन  यह युद्ध अधिक प्रसिद्ध है इसमें  इसमें आल्हा का पराक्रमी छोटा भाई उदल मारा गया था यह युद्ध 1182 में चंदेल सेना और चौहान सेना के बीच लड़ा गया था इस युद्ध में आल्हा के भाई उदल की मृत्यु हो जाती है जो कि बहुत ही बलशाली थे उन्हें सरस्वती माता का वरदान था कि कोई भी व्यक्ति उन्हें युद्ध में हरा नहीं सकता सर कटने के बाद भी वे युद्ध करते रहे 

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु कैसे हुई 

पृथ्वीराज चौहान एक शूरवीर योद्धा थे पृथ्वीराज चौहान को दुश्मनों के हाथों मरना पसंद नहीं था इसलिए उन्होंने मुहम्मद गौरी के राज महल में अपने दोस्त चंद्रवरदाई के साथ मिलकर एक दूसरे की हत्या कर ली पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु 1192 मैं हुई थी ऐसे महान शूरवीर योद्धा को मैं तहे दिल से नमन करता हूं | पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के बाद संयोगिता का क्या हुआ 

जब पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु हो गई थी तब मोहम्मद गौरी का सेनापति कुतुब मनी- ए- बाकर  ने सोचा  मैं पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता के साथ साथ हजारों हिंदू नारियों का अपहरण कर लूं वह अपने सपने को पूरा करने के लिए पृथ्वीराज चौहान के राज महल को चारों तरफ से घेर लेता है और आगे बढ़ना शुरू कर देता है जब वह आगे बढ़ता है तो वह देखता है कि पृथ्वीराज चौहान के महल के चारों तरफ एक गड्ढा  है उस गड्ढे में एक  पुल बना हुआ था जो कि टूट चुका था

संयोगिता ने पहले से ही पुल  को सैनिकों द्वारा तोड़ने का आदेश दे दिया दिया था क्योंकि वह मुस्लिम व्यक्तियों की सोच के बारे में जानती थी कि उनकी कितनी गिरी हुई सोच है संयोगिता ने जोहोर करने की तैयारी शुरू करवा दी थी यह कोई हिंदू प्रथा नहीं थी वह अपनी इज्जत व सम्मान को सम्मान को बचाने के लिए यह जोहोर किया जाता था इसमें औरतें अपने आप को अग्नि में जला देती थी इसे ही जौहर प्रथा कहा जाता था

कुतुब मनी एबर करने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि जितने भी हिंदू सैनिक वह नागरिक जो बंदी बनाए गए हैं उन्हें मार कर इस गड्ढे को भरा जाए और उसके बाद इस गड्ढे को पार करके हम राज महल में प्रवेश करेंगे इंदु हिंदू नागरिकों को मारकर उस गड्ढे में फेंक दिया उनकी संख्या हजारों लाखों में थी उसके बाद राज महल में जाने के लिए प्रयास किया गया तोड़ने की कोशिश की गई जब वह उनको नहीं तोड़ पाए तो उन्होंने राजमहल की दीवारों को तोड़ना शुरू कर दिया पृथ्वीराज चौहान की राजमहल की दीवार इतनी मजबूत थी की उन्हें कोई भी जल्दी से तोड़ नहीं सकता था

इसके बाद उन्होंने दीवार तोड़ने के लिए एक पागल हाथी को उन दीवारों के सामने खड़ा कर दिया इसके बाद कुतुब मनी ने जयचंद के पुत्र  वीरचंद को दरवाजे के सामने खड़ा कर दिया पागल हाथी ने दीरचंद को इतनी जोर से टक्कर मारी कि वे दरवाजे से चिपक गया और दरवाजा टूट गया | पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

पृथ्वीराज चौहान द्वारा जौहर प्रथा 

जौहर प्रथा वह प्रथा होती थी जिसमें औरत अपने आप को अग्नि में जलाकर सती कर लेती थी या सती हो जाती थी जब मोहम्मद गौरी के सेनापति कुतुब मनी ने राज महल के अंदर जाकर देखा तो संयोगिता के साथ हजारों हिंदू नारियों ने अपने आपको जौहर कर लिया था यह देख कर वह बहुत ही उदास हो गया हमारे देश में ऐसी अनेक वीरांगना हुई है जो कि अपने स्वाभिमान को बचाने के लिए अपने आप को खत्म कर लिया था | पृथ्वी राज चौहान का इतिहास और जीवन परिचय

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