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भगत धन्ना जाट की कहानी

भगत धन्ना जाट की कहानी, ठाकुर जी का प्रकट होना , धन्ना जी के खेत का किस्सा, धन्ना जाट की पूरी जानकारी, धन्ना जाट की कथा

भगत धन्ना जाट की कहानी 

धन्ना भगत का जन्म 1415 ईस्वी में राजस्थान के टोंक जिले के धूवा गांव में हुआ था इनका परिवार अशिक्षित था धन्ना जाट का संबंध एक किसान परिवार से था धन्ना भगत का बचपन का नामधन सिंह था धन्ना जाट के गुरु का नाम रामानंद था इनके पिता जी धार्मिक प्रवृत्ति के थे इनके पिता जी का नाम रामेश्वर जाट था धन्ना जाट का झुकाव भक्ति और अधिक था और एक दिन यह घर बार छोड़कर बनारस चले गए और वहां रामानंद जी से दीक्षा ले उनके शिष्य बन गए संत धन्ना जी निर्गुण भक्ति के उपासक थे पांचवें सिख गुरु अर्जुन देव ने भी धन्ना जाट की भक्ति भाव के बारे में “गुरु ग्रंथ साहिब” में उल्लेख किया है वह एक प्रसिद्ध महापुरुष थे | भगत धन्ना जाट की कहानी |

ठाकुर जी का प्रकट होना 

एक बार जब पंडित गांव में श्रीमद भगवत गीता का पाठ पूरा कर कर वापस जा रहे थे तब धन्ना भगत ने उनके पांव पकड़ लिए और कहा कि पंडित जी आपने कहा था कि जो ठाकुर जी की पूजा करता है वह इंसान है और जो नहीं करता वह हैवान है और आपने यह भी कहा था कि जो ठाकुर जी की पूजा करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है क्योंकि धन्ना भगत ने श्रीमद भगवत गीता का सार बहुत ही ध्यान से सुना और उसमें जो भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का जो वर्णन किया गया था उसके बारे में धन्ना जाट ने बहुत ही ध्यान से सुना था

उस समय उनकी आयु केवल 5 वर्ष की थी  इसके बाद धन्ना जाट ने उस पंडित से कहा कि आप मुझे जाते समय ठाकुर जी की पूजा की विधि बता कर जाइए वह पंडित जी बोले जैसा तुझे आता है वैसे कर लेना इस पर धन्ना ने कहा स्वामी मेरे पास ठाकुर जी नहीं है इसलिए आप मुझे ठाकुर जी दे दीजिए इसके बाद उस पंडित ने धन्ना जी को एक पत्थर कपड़े में लपेट कर दे दिया और कहा कि यह ठाकुर जी है और तुम इसकी पूजा कर लेना इसके बाद जिद करके धन्ना ने फिर से पंडित जी से पूछा कि इनकी पूजा कैसे की जाती है तब पंडित जी ने कहा पहले ठाकुर जी को स्नान कराना उसके बाद तुम करना और पहले ठाकुर जी को खाना खिलाना और उसके बाद ही तुम खाना इसके बाद धन्ना जाट ने उस पत्थर को घर में ले जाकर स्थापित कर दिया

धन्ना जाट की नजर में वह पत्थर ठाकुर जी की मूर्ति था उनके मन में ठाकुर जी के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा थी इसके बाद धन्ना जाट ने पहले ठाकुर जी को स्नान कराया और उसके बाद खुद ने स्नान किया धन्ना जाट बहुत ही गरीब परिवार से थे उनके पिताजी की मृत्यु हो चुकी थी अब घर में मां और बेटा रहते थे जब खाना खाने  का समय हुआ तब धन्ना जाट के हिस्से में एक रोटी आई वह रोटी और मक्खन उन्होंने पहले ठाकुर जी के सामने रखा और कहा कि ठाकुर जी पहले आप खा लीजिए उसके बाद ही मैं भोजन ग्रहण करूंगा इस प्रकार 6 दिन बीत गए पर ठाकुर जी ने भोजन ग्रहण नहीं किया था फिर अंत में धन्ना जाट ने कहा यदि आप भोजन ग्रहण नहीं करोगे तो मैं भी भोजन नहीं खाऊंगा 

इसके बाद वह धन्ना जाट रोने लगा और ठाकुर जी से कहने लगा कि मैं गरीब हूं इसलिए आप मेरी रोटी नहीं खा रहे हो मेरे पास सूखी रोटी है इसलिए आप मेरी रोटी नहीं खा रहे हो वह ठाकुर जी को उलहाने देने लगा धन्ना जाट ने ठाकुर जी से कहा कि आप मेरे कारण 6 दिन से भूखे प्यासे हो इसके बाद धन्ना जाट ने कहा यदि तुम खाना खाने के लिए नहीं आओगे तो मैं मर जाऊंगा जब धन्ना ने मरने के लिए चाकू उठाया तो उस पत्थर में से तेज प्रकाश निकलने लगा और धन्ना जाट का हाथ पकड़ लिया और कहा धन्ना देख मैं खाना खा रहा हूं ठाकुर जी को खाना खाते देख धन्ना बोले आधी रोटी मेरे लिए भी रखना मैं भी भूखा हूं तब ठाकुर जी ने कहा तुम दूसरी रोटी खा लेना फिर धन्ना बोले मेरे हिस्से में एक ही रोटी आती है यदि मैं दूसरी रोटी खाऊंगा तो मेरी मां भूखी रह जाएगी 

इसके बाद ठाकुर जी बोले तुम दूसरी रोटी क्यों नहीं बनाते तब धन्ना जाट ने कहा कि हमारा छोटा सा खेत है हम दूसरी रोटी कैसे बनाएं फिर ठाकुर जी ने कहा तुम दूसरों का खेत लेकर क्यों नहीं जो लेते फिर धन्ना ने कहा कि मैं अकेला हूं इसलिए थक जाता हूं यदि मुझे बिना पैसे का नौकर मिले तो मैं आधी रोटी खिलाकर उससे काम करवा लूं इसके बाद ठाकुर जी धन्ना जाट के साथ साथी के रूप में काम करने लगे जहां-जहां ठाकुर जी के कदम पड़े वह धरती रिद्धि सिद्धि से भर गईकुछ समय में थाना जाट ने बहुत कमाया और उसने धीरे-धीरे खेत लेने शुरू कर दिए और वह 1 दिन एक बड़ा जमीदार बन गया धन्ना जाट के घर में दुधारू गाय और भैंस बंधी थी और सवारी करने के लिए घोड़ा था लेकिन फिर भी धन्ना जाट के मन में बिल्कुल भी अभिमान नहीं था

5 साल के बाद वह पंडित फिर से उस गांव में आया उसे देखकर धन्ना जाट बोले पंडित जी आप जो ठाकुर जी देकर गए थे वह अच्छा दिन तो भूखा रहा तुम्हारी चिंता में रोटी नहीं खाईजब मैंने जीत की तब उन्होंने रोटी खा ली पहले मैं गरीब था लेकिनअब ठाकुर जी की कृपा है उस पंडित ने धन्ना जाट की बात को अनदेखा कर दिया इसके बाद धन्ना जाट ने उस पंडित से कहा कि आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो मुझसे ले लेना और आपको एक दिन मेरे घर पर भोजन करने के लिए आना होगा जब पंडित जी ने आसपास के लोगों से धन्ना जाट के बारे में पूछा तो लोगों ने कहा कि धन्ना जाट अब बड़ा जमीदार बन गया है

उसके घर में कुछ चमत्कार हुआ है वह कहता है कि भगवान उसका काम करते हैं इसके बाद पंडित जी ने कहा जो तुम्हारा काम करता है उस ठाकुरजी को मेरे पास लाना फिर तेरे घर चलेंगे जब यह बात धन्ना जाट ने ठाकुर जी को बताई तो ठाकुर जी बोले यदि तुम उस पंडित को लेकर आओगे तो मैं भाग जाऊंगा ठाकुर जी उस पंडित के सामने नहीं आना चाहते थे क्योंकि उस पंडित का मन एकाग्र नहीं था उस पंडित के मन तप,प्रेम और उसका हृदय शुद्ध नहीं था धन्ना जाट एक कोमल निर्मल स्वभाव के थे उनके मन में कोई भी छल कपट नहीं था | भगत धन्ना जाट की कहानी |

धन्ना जी के खेत का किस्सा

 किसी खेत में पैदावार कम होती है या फसल की बीमारी ठीक नहीं होती तो धन्ना जाट भगत के खेत की मिट्टी ले जाकर डालने पर पैदावार अच्छी व बीमारी ठीक हो जाती है एक बार सब के खेतों में गेहूं पैदा हुए और धन्ना जाट के खेत में तुंबे पैदा हुए जब खेतों में तुंबो का ढेर लगा तो वहां के जागीरदार ने लाटा लिए बिना ही छोड़ दिया तो धन्ना जाट ने कहा मैं बिना लाटा दिए नहीं ले जाऊंगा तो जागीरदार ने दो तुंबे लिए और इनको मौके पर ही फोड़ कर देखा तुंबे के बीज की जगह मोती भरे मिले गांव के जागीरदार ने उसकी याद में गांव के दक्षिण पश्चिम में एक तलाई का निर्माण भी करवाया इस तालाब का नाम मोती तलाब रखा गया था 

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