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कैलाश पर्वत का रहस्य

कैलाश पर्वत का रहस्य अलौकिक शक्ति का निवास कैलाश पर्वत से निकलने वाली झील कैलाश पर्वत पर ध्वनि की आवाज कैलाश पर्वत पर चढ़ने वाला पहला व्यक्ति 

कैलाश पर्वत का रहस्य 

कैलाश पर्वत की परिक्रमा करने का क्या महत्व है कैलाश पर्वत सबसे  गुप्त और सबसे धार्मिक और पवित्र पर्वत माना जाता है इस पर्वत की परिक्रमा लोग सदियों से लगाते आ रहे हैं यहां तक कि हजारों सालों से ,यह स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है जीवन के सारे चरणों, शुद्धिकरण और पुनर्जन्म का प्रतीक है बौद्ध और जैन इस पर्वत के चक्कर लगाने को खोरा कहते हैं वही हिंदू इसे परिक्रमा कहते हैं एक चक्कर लगाना जीवन के पहिए को घुमाने के बराबर है कैलाश पर्वत की 12 बार परिक्रमा कर लेने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं वही 108 बार परिक्रमा कर लेने से व्यक्ति को यह मोक्ष प्राप्त करवा देता है कैलाश पर्वत का रहस्य

अलौकिक शक्ति का निवास 

कैलाश पर्वत की ऊंचाई दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट से लगभग 2200 मीटर कम है फिर भी ऐसा क्यों है कि माउंट एवरेस्ट पर लोग 7000 से अधिक बार चढ़ाई कर चुके हैं लेकिन कैलाश पर्वत अभी अजय है कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और यह हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल रहा है भगवान शिव के घर कैलाश पर्वत से जुड़े ऐसे अनेक रहस्य हैं जिन पर बड़े बड़े वैज्ञानिक द्वारा शोध किए जा रहे हैं लेकिन ऋषि मुनियों के अनुसार उस भोले के निवास के रहस्य को जान पाना किसी साधारण मनुष्य के बस की बात नहीं

कैलाश पर्वत के बारे में तिब्बत मंदिरों के धर्मगुरु बताते हैं कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रभाव होता है और यह शक्तियां कोई आम नहीं बल्कि अद्भुत है आज भी कुछ तो पश्चिमी शक्तियों के माध्यम से आध्यात्मिक गुरुओं के साथ संपर्क करते हैं कैलाश पर्वत समुद्र तल से लगभग 22068 फीट ऊंचा है तथा हिमालय के उत्तरी क्षेत्र तिब्बत में स्थित है  तिब्बत चीन के अधीन है इसलिए कैलाश पर्वत चीन में आता है  कैलाश पर्वत के महत्व को ऊंचाई से नहीं बल्कि इसके विशेष आकार की वजह से समझा जाता है

इसका चौमुखी आकार दिशा बताने वाले कंपस की तरह चार बिंदुओं जैसा माना जाता है कैलाश पर्वत से ही 4 महान नदियों का उदय होता है “सतलुज ,सिंधु, ब्रह्मपुत्र और घागरा यह चारों नदियां इस क्षेत्र को चार अलग-अलग हिस्सों में बांटती है जो पूरे विश्व के 4 भागो को दर्शाता है कैलाश को धरती का केंद्र बिंदु माना जाता है यहां दिशा सूचक यंत्र ठीक से काम नहीं करता क्योंकि चारो दिशा यहीं आकर मिलती है कैलाश पर्वत पर समय तेजी से बीतता है 

कैलाश पर्वत पर समय अन्य क्षेत्रों की तुलना में जल्दी बीतता वहां जाने वाले यात्रियों और वैज्ञानिकों ने अपने बाल और नाखून को तेजी से बढ़ते हुए महसूस किया है जिसके आधार पर उनका अनुमान है कि कैलाश पर्वत पर समय तेजी से बढ़ता है हालांकि वैज्ञानिक इसके पीछे के कारण को ढूंढने में असफल रहे हैं कैलाश पर्वत का रहस्य

कैलाश पर्वत से निकलने वाली झील 

कैलाश पर्वत की चोटियों के बीच दो झील स्थित है पहला मानसरोवर झील जो दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित शुद्ध पानी की सबसे बड़ी झील है यह झील 320 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है और इसका आकार सूर्य के समान है दूसरा राछल झील है जो दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित खारे पानी की सबसे बड़ी झील है यह 225 किलोमीटर में फैली है और चंद्रमा के समान है पुराणों में मानसरोवर झील को ही चीर सागर कहा गया है

यह झील कैलाश पर्वत से  40 किलोमीटर दूरी पर स्थित है इसी झील में शेषनाग पर विराजित  विष्णु और लक्ष्मी संसार को संचालित कर रहे हैं राछल झील के किनारे रावण ने तपस्या करके भगवान शंकर को प्रसन्न किया था एक दूसरे के पास होने के बावजूद मानसरोवर और राछल झील गुणों के मामले में एक दूसरे के सख्त विरोधी हैं मानसरोवर सकारात्मक जबकि राछल नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है

कैलाश पर्वत पर ध्वनि की आवाज 

इस अलौकिक जगह पर प्रकाश और ध्वनि तरंगों का अद्भुत संगम होता है जिसे ओम की ध्वनि प्रगट होती है गर्मियों में जब मानसरोवर झील की बर्फ पिघलती है तब डमरू के बजने की आवाज सुनाई देती है मानसरोवर में एक बार डुबकी लगाने वाला व्यक्ति मृत्यु के बाद रूद्र लोक पहुंच जाता है यदि मानसरोवर की यात्रा पर जाना चाहते हो तो मानसरोवर झील में स्नान करने का समय प्रातः 3:00 से 5:00 तक का होता है जिसे ब्रह्म मुहूर्त के नाम से भी जाना जाता है 

इस समय देवता भी स्नान करने के लिए आते हैं कैलाश पर्वत अपनी स्थिति बदलता रहता है कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6638 मीटर है इसके चोटी की आकृति विराट शिवलिंग की तरह है जिस पर पूरे साल भर बर्फ की सफेद चादर लिपटी रहती है लेकिन कैलाश पर्वत की चोटी तक कभी कोई पर्वतारोही नहीं पहुंच सका कैलाश पर्वत का रहस्य

कैलाश पर्वत पर चढ़ने वाला पहला व्यक्ति 

11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिला रेपा ने कैलाश पर्वत की चढ़ाई पूरी की थी जो आज भी एक अपवाद है बीसवीं सदी में पश्चिमी देशों के अनेक पर्वतारोहियों ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने के लिए अनेकों प्रयास किए लेकिन कभी भी कोई पर्वतारोही सफल नहीं हुआ जब पर्वतारोहियों से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने हैरान कर देने वाली बातें कहीं किसी ने बताया कि

जब यह कैलाश पर्वत पर चढ़ाई कर रहे थे तभी एक दम से बर्फ का तूफान आ गया, किसी को दिल की समस्या हो गई ,कोई दिशा भ्रमित हो गया ,कोई बिल्कुल सही रास्ते पर चल रहा था तभी आगे का रास्ता ही गायब हो गया और जोरदार बारिश होने लगी कोई कैलाश पर्वत पर चढ़ने से पहले ही वापस चला जाता है कैलाश पर्वत के इस रहस्यमई दुनिया को देखते हुए चीन सरकार ने 2001 में कैलाश पर्वत पर चढ़ने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया | कैलाश पर्वत का रहस्य |

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