History

सुरैय्या तैयब जी का इतिहास

सुरैय्या तैयब जी का इतिहास, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के निर्माता कौन थे, तिरंगा का इतिहास, तिरंगे को किसने डिजाइन किया था, अशोक चक्र किसने बनाया

सुरैय्या तैयब जी का इतिहास 

सुरैया जी का जन्म 1919 में आंध्र प्रदेश  की राजधानी हैदराबाद में हुआ था वह एक प्रतिष्ठित कलाकार थी उन्हें समाज में प्रगतिशील विचारों के लिए जाना जाता था उनकी शादी बदरुद्दीन तैयब जी से हुई थी जो एक भारतीय सिविल अधिकारी थे और बाद में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति भी बने थे सुरैया संविधान सभा के तहत विभिन्न समितियों के सदस्य थी और उनमें से कई में प्रमुख भूमिका निभा चुकी है वह काफी कलात्मक और प्रतिभाशाली थी पहला तिरंगा सुरैया ने खुद अपनी देखरेख में दर्जी से सिल्वाया था और इस तिरंगे को नेहरू जी को भेंट किया गया इसके बाद पहली बार प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कार पर जो तिरंगा लहरा, वह सुरैया जी ने दिया था 

तिरंगे के विषय में 

जब 1857 में हिंदुस्तान में रहने वाले लोगों ने अंग्रेजो के खिलाफ बगावत की थी तभी से हिंदुस्तान में रहने वाले लोगों को एक झंडे की कमी महसूस होने लगी थी क्योंकि हिंदुस्तानी अंग्रेजो के खिलाफ जब भी कोई आंदोलन किया करते थे या बड़ी रैली निकालने की सोचा करते थे तो उनके पास ऐसा झंडा मौजूद नहीं हुआ करता था जिसके जरिए से वो तमाम हिंदुस्तान के लोगों को चाहे वह हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या इसाई हो सब को एक झंडे के नीचे जमा कर सके और किसी भी जंग के लिए सबसे जरूरी चीज झंडा होती है क्योंकि उसी झंडे के नीचे ही सारी फौज जमा होती है और वह हिंदुस्तान के लोगों के पास अभी तक मौजूद नहीं था

क्योंकि अंग्रेजो के खिलाफ पूरे हिंदुस्तान में जगह जगह पर लड़ाई शुरू हो चुकी थी इसी वजह से हर इलाके में लोगों ने अपना अपना हिंदुस्तानी झंडा बनाना शुरू कर दिया था 1906 बंगाल में सबसे पहले झंडा बनाया गया था बंगाल में अंग्रेजो के खिलाफ एक रैली निकाली गई थी जिसमें एक ऐसा झंडा बनाया गया था जो 3  रंग से बनाया गया था और यह हिंदुस्तान का पहला तिरंगा था जो तीन रंगो से तैयार किया गया था इस तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया रंग की पट्टी थी और बीच में पीले रंग की पट्टी थी और सबसे नीचे हरे रंग की पट्टी थी बीच वाली पीली पट्टी में हिंदी में वंदे मातरम लिखा हुआ था और नीचे हरी वाली पट्टी में एक सूरज और एक चांद तारा बना हुआ था

इसके बाद हिंदुस्तान का अगला झंडा 22 अगस्त 1906 को बीकाजी  कामा ने बनाया था यह झंडा बंगाल के झंडे से थोड़ा सा अलग था इस झंडे में सबसे ऊपर वाली पट्टी हरी और सबसे नीचे वाली पट्टी लाल रंग की थी इसके बाद हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को भी झंडे को लेकर चिंता होने लगी इसके बाद महात्मा गांधी ने 1921 में ‘पिंगली वेंकैया’ को एक ऐसा झंडा बनाने के लिए कहा जिस में सबसे ऊपर हरा और सबसे नीचे लाल रंग हो और बीच में चरखा बना हो इसके बाद महात्मा गांधी को यह तिरंगा पसंद नहीं आया और उन्होंने फिर से ‘पिंगली वेंकैया को एक नया झंडा बनाने के लिए कहा जिसमें एक रंग अलग हो और वह रंग था सफेद इसके बाद उस तिरंगे में एक तीसरा रंग भी शामिल कर लिया और वह था सफेद रंग

इसके बाद 1931 में इस तिरंगे को स्वीकृति दी गई थी इस तिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया रंग और बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा रंग था और उस झंडे के बीच में एक चरखा बना हुआ था जो गांधी जी के कहने पर बनाया गया था 1931 से लेकर 1947 तक यही तिरंगा रहा और इसी तिरंगे के नीचे हमारे वीर सेनानियों ने लड़ाइयां लड़ी थी 1947 में जब अंग्रेज भारत को छोड़कर चले गए तब सभी के मन में यही विचार था कि हमारे देश का झंडा कैसा हो,क्योंकि जिस झंडे के नीचे रहकर लोगों ने अंग्रेजों के साथ लड़ाई लड़ी थी वह झंडा भारत का नहीं था बल्कि कांग्रेस का झंडा था और भारत के झंडे को कांग्रेस पार्टी से अलग रखना बहुत ही जरूरी था

इसके बाद 1947 में एक टीम बनाई गई और उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई कि भारत के पुराने झंडे में बदलाव करके एक नया झंडा बनाया जाए उस टीम में जवाहरलाल नेहरू, भीमराव अंबेडकर, और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे बड़े-बड़े नेता शामिल थे उस समय संविधान सभा के एक जनरल सिक्योरिटी हुआ करते थे जिनका नाम था बदरुद्दीन तैयब जी और उन्होंने संविधान सभा में सभी को यह सलाह दी कि हमारे पुराने तिरंगे में से चरखे को निकाल कर उसकी जगह अशोक का चक्र लगाया जाए और सभी ने यह बात मान ली और सभी को यह प्रस्ताव पसंद आया इसके बाद हमेशा के लिए बदरुद्दीन तैयब जी के इसी प्रस्ताव को मान लिया गया और भारत के तिरंगे में अशोक के चक्र को शामिल कर लिया गया बदरुद्दीन तैयब जी ने संविधान सभा के सामने जो प्रस्ताव रखा था

वह उनका नहीं था बल्कि उनकी पत्नी सुरैया तैयब जी का था उनकी पत्नी ने ही उन्हें यह सलाह दी थी उन्हीं के मन में यह विचार आया था एक दिन सुरैया ने कागज पर तिरंगे का नक्शा बनाया था और उन्होंने चरखे की जगह अशोका चक्र शामिल किया था इसके बाद कागज के टुकड़े पर बने हुए उसी तिरंगे के नक्शे को ‘बदरुद्दीन तैयब’ जी ने संविधान सभा के सामने पेश किया था उसे देखने के बाद हर किसी ने खुशी के साथ उसे स्वीकार कर लिया था आज भी हमारे देश का तिरंगा उसी तरह बना हुआ है  

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