History

कारगिल का युद्ध

कारगिल का युद्ध

 कारगिल का युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था सन 1947 में अंग्रेजों से आजाद होने के बाद भारत से अलग एक और देश बनाया गया जिसका नाम पाकिस्तान था भारत और पाकिस्तान के बीच में कई युद्ध हुए इनमें से सबसे प्रमुख युद्ध कारगिल का युद्ध माना गया है इस युद्ध में विवाद के कई कारण रहे जैसे कि जल विवाद, कश्मीर को लेकर, सीमा विवाद आदि कारगिल युद्ध की कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में 8 मई से  26 जुलाई तक कश्मीर के कारगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष को कारगिल युद्ध के नाम से जाना गया

कारगिल का युद्ध वह लड़ाई थी जिसमें पाकिस्तान सेना ने द्रास कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की थी भारतीय सेना ने इस लड़ाई में पाकिस्तानी सेना तथा मुजाहिद दिलों के रूप में उसके पीठो को परास्त किया गया कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को उन शहीदों की याद में मनाया जाता है जिन्होंने कारगिल युद्ध में अपने देश के लिए लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया और इस देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए कारगिल युद्ध को भी 1947- 48 तथा 1965 में पाकिस्तान सेना द्वारा कबीलायू की मदद से कश्मीर पर कब्जा करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है |कारगिल का युद्ध

पाकिस्तानी सेना द्वारा कारगिल पर कब्जा 

वास्तव में कारगिल युद्ध कश्मीर पानेऔर भारत को अस्थिर करने के जिहादियों के 20 वर्ष के अभियान का महत्वपूर्ण बिंदु है और यह अनेक मामलों में पहले की अन्य  लड़ाईयो से अलग है कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में सामरिक महत्व की ऊंची चोटिया भारत के अधिकार क्षेत्र में आती हैं उन दुर्गम चोटियों पर शीत ऋतु में रहना काफी कष्ट साध्य होता है इस कारण भारतीय सेना वहां शीत ऋतु में नहीं रहती थी इसका लाभ उठाकर पाकिस्तान ने आतंकवादियों के साथ पाकिस्तानी सेना को भी कारगिल पर कब्जा करने के लिए भेज दिया है

पाकिस्तान ने सीमा संबंधी नियमों का उल्लंघन किया लेकिन उसके पास यह सुरक्षित बहाना था कि कारगिल की चोटियों पर तो आतंकवादियों ने कब्जा किया है ना कि पाकिस्तान की सेना ने ऐसी स्थिति में भारतीय सेना के सामने बड़ी चुनौती थी क्योंकि वार्तालाप से समस्या  नहीं जा सकती थी क्योंकि पाकिस्तान सरकार उन आतंकवादियों को अपना मानने से इंकार कर रही थी दुश्मन का ऊंचाई पर था और भारतीय सेना के सामने आशा निशान पर थी |कारगिल का युद्ध

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध 

1998 में परमाणु बम के सफल परीक्षण के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु बम संपन्न देश थे दोनों के पास बम और बारूद थे भारतीय सेना ने अपना मनोबल रखते हुए पाकिस्तान सेना पर आक्रमण कर दिया था 1999 में युद्ध होने से पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने हेलीकॉप्टर से नियंत्रण रेखा पार की थी और भारतीय भूभाग में करीब 11 किलोमीटर अंदर एक स्थान पर रात बिताई थी मुशर्रफ के साथ 80 ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर मसूद असलम थे दोनों ने जिगरिया मुस्कारा नामक स्थान पर रात बिताई थी “ 3 मई 1999 में एक लोकल ग्वाले ” से मिली सूचना के बाद सौरभ कालिया के पेट्रोल पर हमले ने उस इलाके में घुसपैठ की मौजूदगी का पता दे दिया

भारतीय सेना ने घुसपैठियों को जिहादी समझा और उन्हें खदेड़ने के लिए कम संख्या में अपने सैनिक भेजे थे लेकिन प्रतिद्वंद्वियों की ओर से हुए जवाबी हमले और एक के बाद एक कई इलाकों में घुसपैठियों के मौजूद होने की खबर के बाद भारतीय सेना को समझने में देर नहीं लगी कि असल में यह योजनाबद्ध ढंग से और बड़े स्तर पर की गई  घुसपैठ थी जिसमें केवल जिहादी नहीं पाकिस्तान सेना भी शामिल थी यह समझ में आते ही भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया जिसमें 30,000 सैनिक शामिल थे 8 मई को कारगिल युद्ध शुरू होने के बाद 11 मई से भारतीय वायु सेना की टुकड़ी ने इंडियन आर्मी की मदद करना आरंभ कर दिया |कारगिल का युद्ध

ऑपरेशन सफेद सागर 

कारगिल की लड़ाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की वायु सेना के 300 विमान उड़ान भरा करते थे थल सेना के सपोर्ट में भारतीय वायु सेना ने 26 मई को ऑपरेशन सफेद सागर शुरू किया जब भी जल सेना ने कराची तक पहुंचने वाले समुद्री मार्ग से सप्लाई रोकने के लिए अपनी पूर्वी इलाकों के जहाजी बेड़ों अरब सागर में ला खड़ा किया भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ  मेघ 27 और 29 का प्रयोग किया था  मेघ 27 की मदद से उन स्थानों पर बम गिराए गए जहां पर पाक सैनिकों ने कब्जा जमा लिया था इसके बाद मेघ 29 कारगिल के युद्ध में बहुत ही प्रसिद्ध हुआ

इस विमान से पाक के कई ठिकानों पर r77मिसाइलें  छोड़ी गई थी कारगिल की ऊंचाई समुद्र तल से 16000 से 18000 फीट है उड़ान भरने के लिए विमान को 20,000 की ऊंचाई पर उड़ना पड़ता है ऐसी ऊंचाई पर हवा का घनत्व 30% कम हो जाता है कारगिल के युद्ध में बहुत अधिक बमबारी हुई थी दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहले लड़ाई लड़ी गई थी जिसमें सबसे ज्यादा बमबारी हुई थी कुछ समय भारतीयों ने निश्चय कर लिया था कि वह कारगिल से पाकिस्तानियों को खदेड़ कर ही दम लेंगे इसके बाद भारतीय सैनिकों ने विलक्षण का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सेना को चारों ओर से घेर लिया था “ 26 जुलाई 1999 ” को यह लड़ाई लड़ी गई थी यह युद्ध 2 महीने तक लड़ा गया था कारगिल युद्ध में भारत को विजय श्री प्राप्त हुई 

अमेरिका के हस्तक्षेप के कारण

19 फरवरी 1999 को उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने दिल्ली से लाहौर की यात्रा बस से तय की थीउस समय पाकिस्तान में नवाब शरीफ की सरकार थी यह शांति यात्रा थी  इसमें कई शांत समझौते हुए थे जैसे कि दोनों एक-दूसरे के साथ शांति से रहेंगे कोई भी मुद्दा होगा उसे शांति से बैठ कर सुलझाएंगे क्योंकि उस समय दोनों ने परमाणु बम का परीक्षण सफल तरीके से कर लिया था इसके बाद दोनों परमाणु बम संपन्न देश बन गए थे

लेकिन “अमेरिका के हस्तक्षेप के कारण” भारत सरकार ने पाकिस्तानी सैनिकों को हथियारों सहित निकलने का मौका दे दिया पाकिस्तान को सामरिक महत्व की चोटिया खाली करनी पड़ी और भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों की जिंदा वापसी को स्वीकार कर लिया है इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 3000 सैनिकों को मार गिराया था यह युद्ध 18000 फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था कारगिल युद्ध में भारत के 527 जवान शहीद हुए और 1363 जवान घायल  हुए थे युद्ध के कुछ नियम होते हैं भारतवर्ष ने उन्हीं नियमों का पालन किया है भारत एक ऐसा देश है जिसने हमेशा युद्ध अपने बचाव के लिए लड़े हैं उसने कभी भी किसी भी देश पर कई हजार सालों में कोई आक्रमण नहीं किया है | कारगिल का युद्ध

युद्ध के परिणाम

पाकिस्तान में इस युद्ध के कारण राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई और नवाज शरीफ की सरकार को हटाकर परवेज मुशर्रफ राष्ट्रपति बन गए दूसरी और भारत में युद्ध के दौरान देश प्रेम का उबाल देखने को मिला और भारत की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली भारतीय सरकार ने रक्षा बजट और बढ़ाया था |कारगिल का युद्ध

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