History

बाबा मोहन राम का इतिहास

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बाबा मोहन राम का इतिहास

भारत देश में अनेक देवी देवताओं ने अवतार लिए हैं यहां के प्रत्येक राज्य में किसी न किसी देवता का मंदिर अवश्य मिलेगा  भारत को देवीय चमत्कारों का देश कहा जाए तो कई अति शक्तियों होगी ऐसा ही एक देव है जिन्हें कलयुग के अवतारी बाबा मोहन राम के नाम से जाना जाता है

राजस्थान राज्य के अलवर जिले के भिवाड़ी में स्थित बाबा मोहन राम के मंदिर में बाबा को वर्तमान समय में लाखों लोग प्रतिदिन पूजते हैं राजस्थान हरियाणा के बॉर्डर पर बसे भिवाड़ी अंतर्गत गुज्जर गांव के पहाड़ियों पर बाबा की अद्भुत काली खोली है जिसमें सैकड़ों सालों से दिन-रात अखंड ज्योति जलती रहती है इसे लोग  काली खोली नाम से भी पुकारते हैं बाबा मोहन राम की काली खोली मंदिर गांव “मिलकपुर” में स्थित है जो कि राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत आता है यह दिल्ली से करीब 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

बाबा मोहन राम की गुफा काली खोली के पहाड़ में स्थित है बाबा मोहन राम कलयुग में भगवान श्री कृष्ण के दूसरे अवतार हैं ऐसा माना जाता है कि बाबा मोहन राम के पास दिव्य शक्तियां हैं जिनका इस्तेमाल वह अपने भक्तों के कल्याण के लिए करते हैं बाबा मोहन राम का इतिहास

बाबा मोहन राम की संपूर्ण कथा 

आज से 350 साल पहले 1650 ईस्वी में एक नंदू नाम का ब्राह्मण मिलकपुर के पहाड़ में गाय चराया करता था वह साला वंश का रहने वाला था उसकी भगवान श्री कृष्ण में अटूट श्रद्धा थी वह हमेशा भगवान श्री कृष्ण के चरणों में ध्यान लगाए रहता था समय के साथ साथ उसकी भक्ति भी बढ़ती चली गई भगवान की भक्ति में लीन रहना और गाय चराना ही उसका काम था नंदू की अटूट आस्था को देखकर भगवान श्री कृष्ण ने उसे दर्शन देने का विचार बनाया इसके बाद एक गाय हर रोज आती और नंदू भगत की गायों के साथ मिल जाती इसके बाद नंदू उस गाय की भी देखभाल करने लगा

इस प्रकार धीरे-धीरे समय बीतता गया जब नंदू अपनी गायों को पहाड़ से उतार कर नीचे लेकर आता तो वह गाय सभी गायों से अलग होकर दूसरी तरफ पहाड़ की ओर चली जाती ऐसा सिलसिला लगभग 1 साल तक चलता रहा  एक दिन जब शाम हो जाने पर वह अपनी गायों को वापस लाने लगा तो वह गाय अन्य गायों से अलग होकर जाने लगी तब नंदू ने मन में विचार किया कि यह गाय हर रोज मेरी गायों के साथ मिल जाती है और शाम को अलग पहाड़ी की तरफ चली जाती है इसके बाद नंदू उस गाय के पीछे पीछे चलने लगा कुछ समय चलने के बाद नंदू ने देखा कि वह गाय एक गुफा की ओर जा रही है

वह भी उस गाय के पीछे पीछे उस गुफा के अंदर चला गया उस गुफा के अंदर जाकर नंदू ने देखा कि उस गुफा में एक धूना जल रहा है और वहां पर एक तेजस्वी साधु तपस्या कर रहे हैं साधु के तेज को देखकर नंदू जान गया की यह कोई बड़े संत महात्मा है इसके बाद नंदू ने जाकर उस महात्मा को प्रणाम किया और महात्मा ने नंदू की आवाज को सुन कर अपनी आंखें खोली और उस महात्मा ने नंदू से कहा कि आओ नंदू बैठो कैसे आना हुआ साधु के मुख से अपना नाम सुनकर नंदू हैरान रह गया कुछ समय मौन रहने के बाद साधु ने कहा कि नंदू तुमने मेरी गाय को 1 साल तक चराया है मैं तुमसे बहुत खुश हूं इसके बाद साधु ने नंदू से कहा कि तुम्हें जो मांगना है वह तुम मांग लो

इसके बाद नंदू ने कहा कि हे संत महात्मा मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए आप के दर्शन हो गए ,मैं तो इसी से संतुष्ट हूं इसके बाद उस संत ने नंदू से कहा कि तू मेरा परम भगत बन गया है तेरे दर पर जो भी आएगा वह खाली हाथ नहीं जाएगा यह मेरा वचन है तेरे वंश का कोई ना कोई व्यक्ति हमेशा मेरा भगत बनेगा तेरी वंश के ऊपर हमेशा मेरी कृपा दृष्टि बनी रहेगी आज से तुम मुझे बाबा मोहन राम के नाम से पुकारना आगे चलकर मेरा यही नाम भक्तों के दुख को दूर करने वाला होगा

इस घटना के बाद नंदू भगत ने काली खोली बाबा के प्रकट होने वाले स्थान पर ज्योति जलाई साथ ही मिल्कपुर स्थित जोहड़ की पाल पर कुटिया बनाकर बाबा मोहन राम की भक्ति करने लगे तब से लेकर मिलकपुर में बाबा मोहन राम का पूजा स्थल बनाकर अखंड ज्योत के साथ पूजा होने लगी बाबा के मंदिर में श्रद्धालु आने लगे इसके बाद भिवाड़ी क्षेत्र के अलावा दूरदराज से भी श्रद्धालु दर्शनों के लिए आने लगे बाबा मोहन राम का इतिहास

बाबा मोहन राम की विशेषता 

बाबा मोहन राम के सिर के चारों तरफ एक सोने की अंगूठी है जिसमें सामने एक मोर पंख लगा हुआ है साथ ही वह एक मोटी रुद्राक्ष की माला पहनते हैं बाबा मोहन राम नीले घोड़े पर सवार होते हैं इसलिए उन्हें नीले घोड़े के नाम से भी जाना जाता है ऐसा माना जाता है कि उनका नीला घोड़ा भगवान शेषनाग का अवतार है

जिस की गति हवा से भी तेज है मान्यता है कि जब भी बाबा मोहन राम का कोई भी भगत मुसीबत में होता है तो उनका घोड़ा वहां पहुंच जाता है बाबा मोहन राम को साधारण कपड़ों में एक साधु के रूप में दर्शाया गया है बाबा मोहन राम को दिव्य ज्योति के रूप में भी पूजा जाता है

बाबा मोहन राम की तपोभूमि भिवाड़ी में बाबा का मुख्य मेला साल में दो बार होली और रक्षाबंधन पर लगता है यह मेला लगातार तीन दिन तक चलता है जिसमें करीब 22 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं इसके अलावा हर माह की पूर्णिमा के बाद वाली द्वितीय तिथि पर मेला लगता है जिसमें बाबा की ज्योति के दर्शन करने के लिए यूपी, हरियाणा ,दिल्ली और राजस्थान सहित अन्य जगहों से भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं

बाबा मोहन राम का इतिहास

 

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